Maths Teaching Mathods :--
1. विश्लेषण विधि :---
इस विधि के द्वारा तथ्यों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित किया जा सकता है।। और साथ ही इस विधि द्वारा बालकों में तर्क करने, चिन्तन करने, स्मरण करने, का विकास होता है।।
विश्लेषण विधि एक प्रकार कि अनौपचारिक विधि है और इसे वैज्ञानिक विधि भी कहते हैं।।
विश्लेषण विधि के उपयोग :---
विश्लेषण विधि छोटे बालकों के लिए उपयोगी होती है यह विधि रेखागणित में सर्वाधिक उपयोगी है।। साथ ही यह विधि तर्क प्रधान विधि है।।
इस विधि में समय अधिक लगता है तथा यह खोजकर्ता के रूप में कार्य करती है इस विधि द्वारा बालकों में क्या , कैसे , क्यूं आदि सवाल करने कि जिज्ञासा पैदा होती है
इस विधि द्वारा हम विभिन्न खण्डों में विभाजित कर सकते हैं
विश्लेषण विधि के सूत्र :---
1 अज्ञात से ज्ञात की ओर - इस विधि में हम शुरुआत से कुछ भी नहीं जानते फिर हम धीरे-धीरे ज्ञात कि ओर बढ़ते हैं
2 प्रमाण से प्रत्यक्ष की ओर :---
3 निष्कर्ष से तथ्यों/अनुमान की ओर :---
विश्लेषण विधि के पद :---
1 समस्या की प्रस्तुति
2 समस्या की अनुभूति
3 समस्या का विश्लेषण
2. संश्लेषण विधि :---
इस विधि द्वारा छोटे-छोटे तथ्यों को एकत्रित किया जाता है।।
इस विधि द्वारा बालकों का केवल स्मृति का विकास होता है
संश्लेषण विधि एक प्रकार कि औपचारिक विधि है।साथ ही तार्किक विधि भी है।।
संश्लेषण विधि का उपयोग :---
संश्लेषण विधि बड़ी कक्षाओं के लिए उपयोगी होती है
इस विधि में कम समय लगता है।। इस विधि द्वारा विधार्थी केवल तर्क के आधार पर कार्य करता है।।
संश्लेषण विधि के सूत्र :---
1 ज्ञात से अज्ञात की ओर
2 प्रत्यक्ष से प्रमाण की ओर
3 अनुमान से निष्कर्ष की ओर
NOTE :-- आगमन विधि और निगमन विधि एक दूसरे के पूरक/ विपरीत विधि है।।
3. आगमन विधि :----
आगमन विधि आगमन के सिद्धांत पर आधारित विधि है।
आगमन विधि किसी विशिष्ट स्थिति को सामान्य स्थिति में परिवर्तन करती है इस प्रकार से यह विधि विशिष्ट से व्यापक मूर्ति स्थितियों से अमूर्त स्थितियों तथा सरल उदाहरणों से जटिल सूत्रों की ओर अग्रसर होती है इस विधि से प्राप्त ज्ञान स्थाई होता है तथा इस विधि द्वारा बालकों की मानसिक शक्तियों का विकास होता है
आगमन विधि के सूत्र :---
1 विशिष्ट से सामान्य की ओर
2 स्थूल से सूक्ष्म की ओर
3 ज्ञात से अज्ञात की ओर
4 उदाहरण से नियम की ओर
आगमन विधि के उपयोग :----
इस विधि का उपयोग छोटी छोटी कक्षाओं के लिए किया जाता है आगमन विधि के द्वारा नए विषयों का परिचय कराया जाता है।। और नियमों को सूचित किया जाता है।
आगमन विधि के पद :---
1 विशिष्ट उदाहरणों का प्रस्तुतीकरण
2 प्रेक्षण
3 व्यापी करण
4 सत्यापन
आगमन विधि के लाभ :---
आगमन विधि एक वैज्ञानिक विधि है विधि के द्वारा विद्यार्थी स्थाई ज्ञान प्राप्त करते हैं यह विधि विद्यार्थियों को स्वयं कार्य करने के लिए प्रेरित करती है आगमन विधि गणित शिक्षण के लिए सर्वाधिक उपयोगी विधि है।।
आगमन विधि के दोष :---
आगमन विधि की प्रक्रिया बहुत धीमी है इस विधि में समय अधिक लगता है और परिश्रम भी अधिक लगता है
4. निगमन विधि :----
निगमन विधि आगमन विधि के ठीक विपरीत विधि है यानी यह दोनों विधि एक दूसरे के पूरक विधियां हैं
यह विधि निगमनो पर आधारित विधि है।। यह विधि सामान्यतः उच्चतर कक्षाओं में प्रयोग की जाती है
निगमन विधि के सूत्र :----
1 सामान्य से विशिष्ट की ओर
2 सूक्ष्म शरीर स्थूल की ओर
3 अज्ञात से ज्ञात की ओर
4 नियम से उदाहरण की ओर
निगमन विधि के लाभ :---
विद्यार्थी और शिक्षक के द्वारा इस विधि को बार-बार उपयोग में कर सकते हैं इस विधि के द्वारा गणित के कार्य करने बहुत ही आसान हो जाते हैं।। इस विधि के द्वारा शिक्षक और विद्यार्थियों के समय में बचत और उनकी उर्जा भी कम खर्च होती है।।
निगमन विधि के दोष :----
निगमन विधि से प्राप्त ज्ञान स्थाई नहीं होता है। इस विधि के द्वारा रखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है इस विधि के द्वारा कराया गया शिक्षण से विद्यार्थियों में रुचि को विकसित नहीं करता है इस विधि के द्वारा विद्यार्थी करके या स्वयं कार्य नहीं कर सकते हैं।।
5. समस्या समाधान विधि :----
इस विधि में समस्या का चयन विद्यार्थी स्वयं करता है तथा साथ ही विद्यार्थी अपने पूर्व ज्ञान, विचार ,तर्क आदि के द्वारा नवीन ज्ञान की प्राप्ति करता है
इस विधि का विकास प्रयोजनवाद से होता है तथा यह विधि अन्वेषण विधि से मिलती जुलती है ।।
समस्या समाधान विधि का उपयोग & प्रयोग :---
इस विधि में सृजनात्मक चिंतन, तार्किक चिंतन, अंतर्दृष्टि/सुझ, संप्रत्यय निर्माण, आलोचनात्मक चिंतन, विवेचन चिंतन, आदि का विकास होता है
समस्या समाधान विधि के पद :----
1 समस्या का चयन
2 समस्याओं से संबंधित विभिन्न तथ्यों एवं आंकड़ों का एकत्रीकरण एवं व्यवस्थित
3 समस्या के महत्व को स्पष्ट करना
4 तथ्यों कि जांच करना
5 सामान्यीकरण & निष्कर्ष निकालना
6 मूल्यांकन करना
समस्या समाधान विधि के लाभ :----
करके सीखना , रुचि का महत्व , विद्यार्थी सक्रिय रहते हैं , शिक्षक और विद्यार्थी दोनों मिलकर कार्य करते हैं, वैज्ञानिक प्रकृति , स्थाई ज्ञान का निर्माण।, सृजनात्मक चिंतन का विकास होता है सृजनात्मक चिंतन बीएफ स्किनर द्वारा दिया गया है।, इस विधि के द्वारा मानसिक शक्तियों का विकास होता है।।
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