वृद्धि एवं विकास में क्या अंतर है :---
( what-is-the-difference-between-growth-and-development )
1. वृद्धि का तात्पर्य यह है कि वृद्धि का संबंध शरीर तथा व्यवहार के परिवर्तनों से होता है जबकि विकास शब्द का प्रयोग शरीर के विभिन्न अंगों की गुणात्मक विकास के संदर्भ में किया जाता है।।
2. वृद्धि के अंतर्गत आए परिवर्तनों को मापा जा सकता है तथा उन्हें संख्यात्मक आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है जिसे हम एक उदाहरण की सहायता से देख सकते हैं
जैसे कि किसी विद्यार्थी के बाहर और कद की लंबाई को आंकड़ों में लिख सकते हैं जैसे--60 किलो, 5 फुट-6 इन्च ।।
जबकि विकास को केवल देखा या महसूस किया जा सकता है विकास के गुणात्मक पक्ष को मापने का कोई तरीका नहीं है जैसा कि बालक की भाषा का विकास या उसके चेहरे के रंग रूप का विकास होता है।।
3. वृद्धि निरंतर नहीं होती है वृद्धि एक निश्चित आयु स्तर पर जाकर रूक जाती है अगर एक बालक कि आयु 18 वर्ष हो जाती है तो उसका कद बढ़ना बन्द हो जाता है।।
विकास का क्रम जन्म से लेकर मृत्यु तक चलता रहता है इस प्रकार विकास की प्रक्रिया कभी रुकती नहीं है।।
4. वृद्धि शब्द का अर्थ संकीर्ण दर्ष्टिकोण से देखा जाता है वृद्धि विकास के विभिन्न तत्वों में से एक तत्व है।।
विकास बहुत ही व्यापक शब्द है विकास की प्रक्रिया में ही वृद्धि शामिल होती है ।
5. वृद्धि का संबंध मात्रा से होता है इसमें परिमाणात्मक परिवर्तन आते हैं जबकि विकास का संबंध गुणात्मक परिवर्तनों से होता है
6. वृद्धि और विकास एक दूसरे के पूरक होते हैं वृद्धि के बिना विकास नहीं हो सकता। इसके साथ ही विकास के बिना वृद्धि भी नहीं हो सकती।
गर्भ कालीन अवस्था के दौरान बच्चे का क्रियात्मक विकास कैसे होता है :----- (How does the child's functional development take place during the gestational stage? )
बच्चे का क्रियात्मक विकास जन्म के समय नहीं जन्म से पूर्व ही गर्भावस्था में ही प्रारंभ हो जाता है वैज्ञानिकों ने अपने शोध अध्ययनों के आधार पर पाया है कि गर्भस्थ शिशु की क्रियात्मक क्षमताओं का उद्भव 6 सप्ताह में हो जाता है गर्भ कालीन अवस्था में शिशु का क्रियात्मक विकास उसके द्वारा करवट बदलना, पलटीना शरीर को मोड़ना ,पैर फटकारना, हाथ फेंकना एवं सिर से धक्का देना आदि रूपों में होता है।। शिशु की इन क्रियाओं में भी व्यक्ति गत भिन्नताएं पाई जाती है।।
क्रियात्मक विकास का क्या महत्व होता है :---
(W hat is the importance of functional development )
1. समुचित प्रकार के क्रियात्मक विकास अवस्था में बालक का अपने परिवार, खेल के साथियों तथा विद्यालय आदि विभिन्न क्षेत्रों में उचित समायोजन होता है अच्छे तरीके से समायोजन होने पर व्यक्तित्व का विकास भी पूर्ण व प्रभावशाली रूप से होता है
2. बालकों में सही क्रियात्मक योग्यताओं एवं कौशलों के परिणाम स्वरुप ही आत्म प्रत्यय की उत्पत्ति होती है जब बालक में सुरक्षा की भावना जागृत हो जाती है तब उसमें आत्मविश्वास की भी भावना पर्याप्त मात्रा में आ जाती है जिससे उसका क्रियात्मक विकास अच्छी तरीके से होता है और वह आपस में अच्छा समायोजन कर सकते हैं।।
मस्तकोधोमुखी विकास का क्या क्रम होता है :----
(what is the sequence of cephalic development )
मस्तकोधोमुखी विकास के सिद्धांत के अन्तर्गत विकास का क्रम सिर से पैर की ओर होता है। जन्म से लेकर तीसरे महीने तक बालक अपने सिर को नियंत्रित कर लेता है। इसके बाद टांगों और बाजुओं की मांसपेशियों, इसके पश्चात हाथों, पैरों तथा उॅंगलियों की मांसपेशियों पर नियंत्रण करना बालक सीख जाता है। इसके साथ ही बालक का संपूर्ण विकास होना प्रारंभ हो जाता है इसके साथ बालक के शरीर का विकास प्रारंभ हो जाता है जिससे बालक छोटी-छोटी क्रियाएं करने लगता है ।।
परिपक्वता किसे कहते हैं :---- (what is maturity
बालक की समुचित वृद्धि और विकास के बाद उसके व्यवहार में जो एक स्थिरता आती है परिपक्वता के कारण ही आती है और सांवेगिक सामान्यता प्रदर्शित होती है उसे परिपक्वता कहा जाता है। वुल्फ और वुल्फ ने परिपक्वता का अर्थ विकास की उस निश्चित अवस्था से माना है जिसमें बालक उन कार्यों को करने के योग्य हो जाते हैं जिन्हें वे उस अवस्था में पूर्ण नहीं कर सकते हैं परिपक्वता के कारण व्यवहार में प्रजातीय परिवर्तन होते रहते हैं।।